Covid19 : सकारात्मक पत्रकारिता तथा सामाजिक विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित

कोरोना का प्रकोप सारे विश्व में थम नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में समाज को जागरूक और शिक्षित करने में मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोरोना काल में मीडिया जवाबदेही और भूमिका पर मंथन करने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल, कवयित्री बहिणाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय जलगाँव और मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन रविवार 5 जुलाई को किया गया। इस वेबिनार में देश भर प्रख्यात पत्रकारों एवं संपादक ने संबोधित किया। आयोजन की शुरुआत में कवित्री बहिनाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी पी पाटिल एवं प्रति कुलपति प्रो. पी पी माहुलीकर एवं प्र-कुलसचिव प्रो. बी व्ही पवार ने संबोधित कर अपने विचार व्यक्त किए।

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे ने संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना काल के समय में तमाम मीडिया संस्थानों ने अतिरंजित समाचार पेश किए हैं। सिर्फ टीआरपी की होड़ में समाचार संस्थान ऐसा करते हैं। इसी वजह से अच्छा या बुरा प्रभाव समाज पर होता है। इसलिए मीडिया को अच्छा कंटेंट दिखाना चाहिए जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालें।

इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने कहा कि सभी पत्रकारों के लिए इस तरह की खौफनाक महामारी में रिपोर्टिंग का पहला अनुभव रहा। प्लेग महामारी के बाद यह सबसे भयंकर चुनौती है। कोरोना काल में पैन और डायरी की तरह पत्रकारों के लिए भी ग्लब्स और सैनिटाइजर जरूरी हो गया। कोरोना ने पत्रकारों को पत्रकारिता के बहुत नए अनुभव दिए हैं।

नागपुर के वरिष्ठ संपादक प्रकाश दुबे ने कहा कि हर हाल में मीडिया को सभी पहलुओं पर ध्यान में रखते हुए रिपोर्टिंग करना चाहिए। महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो के साथ अब मीडिया को बुरा दिखाना नहीं चाहिए। पत्रकारिता की कसौटीयों में परेशानियां आने की वजह है यह है कि समाज ने पत्रकार को महत्वपूर्ण नहीं माना। मीडिया समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रायपुर की वरिष्ठ पत्रकार सौ. प्रियंका कौशल ने कहा कि कोरोना काल में मीडिया के सामने बहुत चुनौती आईं हैं। समाचार पत्र संकट के दौर में चले गए। कोरोना महामारी में पाठक डिजिटल मीडिया की और सकारात्मक भाव से देख रहे हैं। वेब मीडिया से बहुत तेजी से लोग जुड़ रहे हैं।

उदयपुर के वरिष्ठ पत्रकार संदीप पुरोहित ने कोरोना काल और मीडिया का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कुरोना काल में पत्रकारों के सामने हर रोज नई-नई चुनौतियां आई हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया अब पहले से अधिक परिपक्व हुआ है। समाचार संस्थानों को हर माध्यम पर उपलब्ध रहना चाहिए।

वरिष्ठ संपादक प्रो. कमल दीक्षित ने कहा कि मीडिया को यह स्व मूल्यांकन करना चाहिए कि कोरोना काल में दिखाई खबरों ने क्या मीडिया ने लोगों का भय बढ़ाया है या घटाया है? कोरोना काल में दिखाई गई खबरों का क्या असर हुआ? अच्छा समाज बनाने के लिए भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मीडिया के मूल्यों का ध्यान रखते हुए पत्रकारिता करना चाहिए।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि मीडिया को भारतीयता के भाव के साथ खबरें दिखाना चाहिए। लोकमंगल के लिए हमें संचार और संवाद करना चाहिए। मीडिया का प्रमुख उद्देश्य सिर्फ लोकमंगल ही है। भारतीय मूल्यों के विकास के लिए मीडिया को अपना योगदान देना चाहिए।

प्रो.संजीव भानावत, जयपुर ने संबोधित करते हुए कहा कि अखबारों के सामने आर्थिक संकट कोरोना काल में ज्यादा आया है। अनेक पत्रकारों की नौकरियां चली गई। लेकिन फिर भी इस भयंकर समय में मिडिया ने जन जागरूकता को बहुत अच्छा योगदान दिया है। मीडिया ने कोरोना से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बीके डॉक्टर रीना ने कहा कि हम सबको एक करने में मीडिया ने महती भूमिका निभाई है। मीडिया ने लोगों को शिक्षित करने का काम किया है। स्वागत भाषण माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के डीन डा. पवित्र श्रीवास्तव ने दिया। वेबीनार का संचालन माखनलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ राखी तिवारी ने किया एवं आभार प्रदर्शन कवित्री बहिनाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुधीर भटकर ने माना। इसके अलावा वेबिनार में मुख्य रूप से जलगाँव विवि के संचालक डा. अनिल चिकाटे, डॉ. विनोद निताळे, डा. गोपी सोरडे, माखनलाल विवि के कुलसचिव प्रो. अविनाश बाजपेयी, महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार राजेश राजोरे, डॉ. सोमनाथ वडनेरे, डॉ. अनुराग सीठा, डॉ. गजेंद्र सिंह, मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप कुलश्रेष्ठ, प्रभाकर कोहेकर, दिलीप बोरसे, सोमनाथ म्हस्के, तरुण सेन, सोहन दीक्षित एवं इनके साथ तिनो संस्थाओ के कई सदस्यों ने सहयोग दिया|

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