कुसमी मे परिवेक्षक होने के बाद भी सिहावल परिवेक्षक को दे दिया गया ,कुसमी परियोजना अधिकारी का प्रभार।

 

अमित श्रीवास्तव।

सीधी के कुसमी महिला बाल विकाश विभाग की परियोजना अधिकारी गीता तिवारी की सर्विस अवधि पूरा होने के बाद कुसमी परियोजना अधिकारी का पद खाली हुआ,पद खाली होते ही कुसमी परियोजना अधिकारी का प्रभार जिले के 150कि.मी. सिहावल की पर्यवेक्षक अनुउसूइया बाजपेई को प्रभार दे देना लोगो के समझ से परे है, जबकि यहां सीनियर पर्यवेक्षक कुसमी मे कार्य कर रही है और उनको कुसमी क्षेत्र के हर आगंनवाडी केन्द्रो की स्थिति का पता है।आपको बता दें कुसमी क्षेत्र अंतर्गत आने बाली आगनवाडी केन्द्र पहाडी क्षेत्रो मे है।जिससे निरीक्षण करना परियोजना अधिकारी के लिये काफी कठिन हो जाता है ।एक दिन मे एकाद गांव ही अधिकारी घूम पाते है।
ऐसे में यदि सिहावल के पर्यवेक्षक जो 150दूर है उनको कुसमी का प्रभार दिया गया है तो यहा का काम किस तरह से संचालित होगा आप खुद समझ सकते है।
ऐसे में जिलाधिकारियों को फिर से बिचार करना चाहिए कि इतनी दूर के अधिकारियों को प्रभार देने से अच्छा है कि कुसमी के परिवेक्षक को ही प्रभार दिया जाय। वैसे शासकीय पदो पर कार्य करने वाले अधिकारियो की सीनियरटी के हिसाब से प्रभार दिया जाना नियमोचित है।बताया यह भी जा रहा है कि जिले में कई सीनियर अधिकारी पदस्त हैं,जो कुसमी क्षेत्र की हर गतिविधि से वाकिफ है और जिले से कुसमी की दूरी 80किलो मीटर यानी सिहावल से आधी है।इनमे से ही किसो को परियोजना का प्रभार देना उचित होता लेकिन जिले के लोगो पर विश्वास न होकर आखिर सिहावल के ही परिर्वेक्षक पर ही विश्वास जताना सोचनीय विषय है।ऐसे मे क्षेत्रीय जनता मान रही है कि जिला महिला बाल विकास अधिकारी कुसमी को लेकर। शायद गंभीर नही है।

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