हीरे की धोखाधड़ी:कारोबारी का पंजाब ज्वेलर्स पर आरोप, 17 लाख रुपए में हीरे की जगह कांच के टुकड़े दिए; 2 साल बाद केस दर्ज

हीरे की धोखाधड़ी:कारोबारी का पंजाब ज्वेलर्स पर आरोप, 17 लाख रुपए में हीरे की जगह कांच के टुकड़े दिए; 2 साल बाद केस दर्ज

भोपाल के अरेरा हिल्स थाने में करीब दो साल बाद मामला दर्ज हो सका। – फाइल फोटो
  • कारोबारी ने पत्नी के लिए अंगूठी और कान के टॉप्स खरीदे थे, 4 साल बाद नकली होने का पता चला
  • खुद कारोबारी ने भोपाल और मुंबई की लैब में भेजकर हीरे की जांच कराई, एसटीएफ से लेकर ईओडब्ल्यू से शिकायत की

भोपाल के एक कारोबारी ने पंजाब ज्वेलर्स पर आरोप लगाया है। कारोबारी का कहना है कि उसने 4 साल पहले पंजाब ज्वेलर्स से हीरे की अंगूठी और टॉप्स लिए थे। तब संचालक और मैनेजर ने जालसाजी कर साढ़े 17 लाख रुपए कीमत के हीरे की जगह कांच के टुकड़े थमा दिए। कारोबारी ने इसकी जांच एक प्राइवेट ज्वेलर्स के यहां कराई, तो धोखाधड़ी का पता चला। फिर खुद भोपाल से लेकर मुंबई तक दो अलग-अलग लैब में हीरे की जांच करवाई।

जांच में हीरे नकली ही निकले। इसकी शिकायत उन्होंने एसटीएफ से लेकर ईओडब्ल्यू और पुलिस थाने तक की। जांच होते-होते मामला अरेरा हिल्स थाने पहुंचा। पुलिस ने अब पंजाब ज्वेलर्स के संचालक और मैनेजर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।

कोहेफिजा निवासी सैयद तारिक अली का होर्डिंग का कारोबार है। उन्होंने पुलिस को बताया कि 8 जून 2014 को उन्होंने मालवीय नगर स्थित पंजाब ज्वेलर्स से पत्नी के लिए टॉप्स और अंगूठी ली थी। इसमें हीरे जड़े हुए थे। टॉप्स 9 लाख से अधिक और अंगूठी का हीरा 7 लाख रुपए से अधिक कीमत का था। दोनों की कुल कीमत 17 लाख 45 रुपए थी। साल 2018 में एक प्राइवेट ज्वेलर्स के यहां हीरे की जांच कराई।

यहां पता चला कि यह हीरा नहीं बल्कि कांच के टुकड़े हैं। इसके बाद उन्होंने दो लैब में इसकी जांच कराई। भोपाल और मुंबई की हीरे की जांच करने वाले लैब की रिपोर्ट भी कांच के टुकड़े होने की आई। उन्होंने इसकी शिकायत की। जांच के बाद अरेरा हिल्स पुलिस ने गुरुवार देर रात संचालक दर्पण आनंद और मैनेजर राजेश चोपड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

इस तरह सामने आया सच
तारिक ने बताया कि वे पंजाब ज्वेलर्स के लिए भी होर्डिंग बनाने का काम करते हैं। इसी पेमेंट के बदले ही उन्होंने हीरे की रिंग और टॉप्स बना कर दिए थे। पांच साल तक तो केवल ऐसे ही रखे रहे। उन्होंने ध्यान नहीं दिया। जब उन्होंने दूसरे जेवर बनवाने के लिए इसे चेक करवाया, तो वह नकली निकले।

एसटीएफ ने जांच की
तारिक के मुताबिक, उन्होंने करीब ढाई साल पहले इसके बारे में संचालक दर्पण आनंद और मैनेजर राजेश चोपड़ा को बता दिया था। पहले तो वह बदलकर दूसरा देने की बात करते रहे, लेकिन बाद में पलट गए। उन्होंने इसकी शिकायत एसटीएफ भोपाल से की। एसटीएफ जांच कर रही थी। दर्पण को पूछताछ के लिए बुलाया भी गया था। हालांकि चुनाव आदि आने के कारण फिर मामला टलता गया।

परेशान होकर उन्होंने इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू से की। मामला अरेरा हिल्स थाने पहुंचा। यहां भी उन्होंने आवेदन दिया था। उन्होंने पंजाब ज्वेलर्स के संचालक और मैनेजर से हुई फोन पर बातचीत का रिकॉर्ड भी पेश किया। उन्होंने बताया कि वे अभी मुंबई में हैं।

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