सीधी डोल वारपान भरुही भूख हड़ताल के नाम पर जारी है मजाक। मीडिया और प्रशासन को माफिया कर रहे गुमराह । ग्राउण्ड रिपोर्टिंग में आंदोलनकारियों की खुली पोल रेत खदानों में अपना हक जताने मचा बवाल,सौंपा ज्ञापन कुछ सामने से तो कुछ पर्दे के पीछे से कर रहे खेल

सीधी एमपी संदेश न्यूज़ 24। रेत खदानों का जब से संचालन हुआ है तब से जिले में कोहराम मचा हुआ है। कुछ सत्ताधारी व विपक्ष के लोग मजदूरों को आगे कर राजनैतिक रोटियां सेंकने में लगे हुए है। आज जब मीडिया की टीम ग्राउण्ड पर पहुंची तो वहां की हकीकत कुछ और ही निकल कर सामने आई। धरने पर बैठे मजदूरों से चर्चा की गई तो स्थानीय मजदूर एक भी नही निकले। धरने पर बैठे मजदूरों की मांग भी अलग-अलग बताई गई। वहीं पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया जब असली श्रमिकों का धड़ा आवेदन लेकर थाने पहुंच गया। आवेदन में श्रमिकों ने जिक्र किया है कि भरूही व डोल में संचालित रेत खदान में पुनीत सिंह चंदेल,डेविड सिंह, अनिल सिंह ददरी, अनिल सिंह पखड़ा,विनोदधर द्विवेदी,अमितधर व इनके साथियों द्वारा गांव के लोगों को दारू पीने व मुर्गा खाने के लिए पैसे बाटते है और धरने में चलने के लिए बोलते है। अगर कोई धरने में जाने से मना करता है तो उसके साथ गाली गलौच व मारपीट की जाती है। पूरे गांव में इन लोगों का आतंक मचा हुआ है। जिससे आहत होकर थाना प्रभारी के समक्ष पहुंचकर ग्रामीणों ने अपनी फरियाद दर्ज कराई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन माफियाओं पर क्या कार्रवाई करता है।

माहौल को बिगाडऩे खेला जा रहा खेल
डोल व भरूही में संचालित रेत खदान में माहौल बिगाडऩे का खेल इन माफियाओं द्वारा जमकर खेला जा रहा है। वहां के कुछ पुष्ट सूत्र बतातें है कि पूर्व में पंचायतों द्वारा संचालित रेत खदान में इन माफियाओं द्वारा जमकर मलाई छानी गई थी। अब रेत की मलाई जब एक बार मुंह में लग गई तो छूटने का नाम नही ले रही है। इन माफियाओं द्वारा प्री प्लान कर पूरे घटनाक्रम को रचा गया है। इनसे मजदूरों से कोई लेनादेना नही है। अगर इन माफियाओं को खदानों में कुछ शेयर मिल जाये तो ये प्रोपोगण्डा समाप्त हो जायेगा।

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